1. PE Ratio क्या है?
PE Ratio (Price-to-Earnings Ratio) दर्शाता है कि निवेशक एक रुपये की कमाई के बदले कंपनी के शेयर पर कितना मूल्य चुका रहे हैं।
Formula:
PE Ratio = Share Price / Earnings Per Share (EPS)
उदाहरण: यदि किसी कंपनी की EPS ₹10 है और शेयर मूल्य ₹100 है, तो PE Ratio होगा:
PE = 100 / 10 = 10
इसका मतलब है कि निवेशक ₹10 की कमाई के बदले ₹100 चुका रहे हैं, यानी निवेश 10 वर्षों में रिकवर हो सकता है (अगर कमाई स्थिर रहे तो)।
2. PE Ratio कैसे काम करता है?
PE Ratio मुख्यतः यह दिखाता है कि बाज़ार कंपनी की कमाई को कितना महत्व दे रहा है। उच्च PE कंपनी के future growth की उम्मीदों को दर्शाता है, जबकि कम PE एक value opportunity या risk संकेत कर सकता है।
3. PE Ratio का Formula और Calculation
| घटक | विवरण |
|---|---|
| Share Price | बाज़ार में मौजूदा शेयर मूल्य |
| EPS | Earnings per Share (Net Profit / Shares) |
| Formula | PE = Price / EPS |
4. आसान उदाहरण और वास्तविक केस स्टडी
उदाहरण:
मान लीजिए ABC Ltd. की EPS ₹20 है और शेयर का बाजार मूल्य ₹400 है:
PE = 400 / 20 = 20
इसका मतलब है कि निवेशक हर ₹20 की कमाई पर ₹400 चुका रहे हैं।
Case Study: Infosys vs TCS PE Ratio
| कंपनी | Price | EPS | Net Revenue | EBITDA | ROE | PE Ratio |
|---|---|---|---|---|---|---|
| Infosys | ₹1,450 | ₹60 | ₹1.48 लाख Cr | ₹40,000 Cr | 23.5% | 24.2 |
| TCS | ₹3,700 | ₹120 | ₹2.25 लाख Cr | ₹62,000 Cr | 27.2% | 30.8 |
Insights:
- TCS का PE ज़्यादा है लेकिन brand value और client stickiness भी अधिक है।
- Infosys में PEG ratio बेहतर है, यानी growth के मुकाबले valuation ज़्यादा fair है।
5. High PE vs Low PE – कौन बेहतर?
| PE Ratio Level | अर्थ | संकेत |
|---|---|---|
| High PE (>25) | Growth expectation ज़्यादा | कंपनी future में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है |
| Low PE (<15) | सस्ता मूल्यांकन या कम ग्रोथ की उम्मीद | Value stock या परेशानी में कंपनी |
6. Industry Wise PE Ratio का महत्व
उदाहरण
| सेक्टर | औसत PE Ratio |
|---|---|
| IT Sector | 25–40 |
| FMCG | 30–45 |
| Banking | 10–15 |
| Pharma | 20–35 |
| Infrastructure | 8–15 |
PE का मतलब तभी निकलता है जब उसे अपने सेक्टर के peers से तुलना की जाए।
7. PE Ratio से जुड़े Pain Points
- सिर्फ PE देखना सही नहीं: कंपनी की ग्रोथ, कर्ज और business model को नजरअंदाज़ करना नुकसानदायक हो सकता है।
- Negative Earnings: जब EPS negative होता है, तब PE काम नहीं करता।
- Manipulated Earnings: कुछ कंपनियाँ EPS को accounting से छुपा सकती हैं।
8. PE Ratio के फायदे और नुकसान
फायदे:
- सरल और उपयोग में आसान
- तुलना में सहायक (same sector)
- तेजी से निवेश निर्णय में सहायक
नुकसान:
- EPS घटते ही PE बढ़ जाता है (misleading)
- Negative या zero EPS में अनुपयोगी
- Future growth या debt को नहीं दर्शाता
9. PE Ratio के अलावा अन्य ज़रूरी Metrics:
| Metric | उपयोग |
|---|---|
| PEG Ratio | PE के साथ ग्रोथ को जोड़ता है (PE / Growth) |
| PB Ratio | Book Value की तुलना (Price / Book Value) |
| EV/EBITDA | Capital structure-neutral valuation metric |
| Dividend Yield | निवेश पर मौजूदा आय (%) |
10. PE Ratio Calculator

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- Share Price डालें
- EPS डालें
- PE अपने-आप निकलेगा
PE = Price / EPS
11. कब उपयोग करें PE Ratio?
PE Ratio का उपयोग करें:
- जब आप same industry में कंपनियों की तुलना करें
- जब कंपनी की कमाई स्थिर हो
उपयोग न करें:
- जब EPS बहुत volatile हो या कंपनी घाटे में हो
- जब growth या debt भारी हो
12. FAQs
Q: क्या Low PE हमेशा अच्छा होता है?
A: नहीं, कभी-कभी Low PE वाली कंपनियाँ slow या declining होती हैं।
Q: क्या PE से multi-bagger स्टॉक चुना जा सकता है?
A: केवल PE नहीं, आपको PEG, ROE, Debt भी देखना चाहिए।
Q: क्या सभी सेक्टर का PE एक जैसा होता है?
A: नहीं, हर सेक्टर की nature और risk profile अलग होती है।
13. निष्कर्ष
PE Ratio निवेश का एक महत्वपूर्ण मापदंड है, लेकिन इसे अन्य ratios जैसे PEG, PB, EV/EBITDA के साथ मिलाकर ही उपयोग करना चाहिए।
केवल PE देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि यह कंपनी की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
निवेश निर्णय लेते समय आपको Profit Growth, Revenue Growth, ROE, Debt Levels और Cash Flow जैसे वित्तीय संकेतकों को भी समझना चाहिए।
हमेशा कंपनी की पूरी वित्तीय सेहत और भविष्य की संभावनाएं जानकर ही कोई कदम उठाएँ।
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